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MACHINE LEARNING IS THE NEW BUZZ. Read the full article… | by Youth4work | Youth4work Knowledge Base | Medium

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23rd-May-18

MACHINE LEARNING IS THE NEW BUZZ

Read the full article: http://www.dailypioneer.com/avenues/machine-learning–is-the-new-buzz.htm

Machine learning is gaining ground in Education & recruitment processes, says Rachit Jain

Machine learning, a term that was coined by Arthur Samuel in 1959 is creating a lot of buzz today. While the word has been in use for some time in India, the reason for the hype is how it really works which is altogether a different story and remains out of grasp for many.

If the present perception is to be believed then machine learning (ML) is synonymous with Artificial Intelligence (AI). More often than not, these two terms are used interchangeably. But this is incorrect. Also, these two ultra-sophisticated terms bring high cachet to the table, especially when an argument regarding technology is involved.

The truth is that machine learning and AI are two different subjects. In layman’s terms, AI aims to make machines smarter by giving those capabilities to think on their own feet to make decisions or mimic human actions whereas machine learning is just a subset of the vast concept, that is, AI.

The most crucial aspect of machine learning is data. Without data, it is not possible. Data is the backbone of ML. Machine learning is an application of and within the AI that provides computers with the ability of learning and to improve from experience without being explicitly programmed. Data is used by the machines to create patterns that make sense to them. Data by itself is useless, unless it is treated in meaningful ways and machines can perform unimageable tasks with data using mathematical algorithm and block chains.

The aim of ML is to allow computers to learn automatically without human intervention and come up with actions accordingly. The number of Indian machine learning start-ups is on the rise. On an average 10 to 15 such new tech start-ups are seen every month, with each claiming to be better than the other. But the success of a new tech start-up cannot be ensured by mere sophisticated AI tools and applications. Having data is essential and acquiring reliable data takes time and effort if done with right ethical practises.

Giants like Google, Amazon, and Facebook took years to accumulate hoards of data and their data is used by many other emerging tech enterprises that are looking for shortcut successes. Such enterprises won’t last long in the long run because machine learning will only prove to be beneficial if the end results are insightfully unique and this can only be ensured with the authenticity of the data so used.

Nonetheless, the scope of machine learning can’t be overlooked, especially in the fields of education and recruitment processes. There have been some promising start-ups in recent times that have dedicated and devoted themselves, over the years, in providing youth with the much needed “job-specific skills” that are essential to survive and sustain growth in a highly volatile job market of the present.

There are various platforms which uses machine learning techniques within the domains of AI to assess the scores of thousands of test-takers every day and gives detailed corporate-assessment. The data so analysed and projected is unique in terms of accuracy and authenticity.

A recent survey analysed that more than 35 per cent of India’s youth is unemployed, which is even lower than the average of global employment level. According to figures projected by the survey report, our country will see a marginal stagnation in 2018–19. As of now, 17.9 million are unemployed and this estimate will further expand to 19 million in 2019.

The size of the youth in our country is enormous and not every youth has the luxury of having platforms like Youth4work at their disposal or are just unaware. So, it is going to be a tremendous challenge to bring these sequestered fractions of the young generation together at one place where talent can be nurtured into employable job skills.

— The writer is CEO of Youth4work

20th-May-18

अभिमत: मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article: https://bharatiyadigitalnews.in/editorial/opinion-skill-development-of-youth-from-machine-learning-youth-4-work-article-in-hindi/

रचित जैन: रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।
मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।
मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।
भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।
गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।
मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।
हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।
भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article: https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/aaj+ki+khabar-epaper-aajkikha/mashin+larnig+se+hoga+yuvao+ka+kaushal+vikas+yuth4vark-newsid-88272395

रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

21st-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article: https://www.viralnews.tv/2018/05/21/machine-learning-se-hoga-yuvaon-ka-kaushal-vikas-youth-4-work/

रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article:https://hindi.thequint.com/hot-news/mshiin-lrnig-se-hogaa-yuvaaon-kaa-kaushl-vikaas-yuuth4vrk

रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article: https://www.aajkikhabar.com/253319/%E0%A4%AE%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%B2%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93/

रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

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मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

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रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

Read the full article: http://rtinews.net/news/national/rtinews-592250/86466.html

  • रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।
  • मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।
  • मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।
  • भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
  • इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।
  • हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।
  • भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।
  • (रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

Keywords : मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क,

20th-May-18

मशीन लर्निग से होगा युवाओं का कौशल विकास : यूथ4वर्क

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रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निग उचित मार्ग बन सकता है, परन्तु मशीन लर्निग की सुविधा के लिए डेटा महत्वपूर्ण कुंजी है। आमतौर पर मशीन लर्निग को एआई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निग इन दोनों की तुलना में एक अलग प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि मशीन लर्निग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसित करना है जो मानव कार्यो की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बनाना है जिससे वे बेहतर हो सकें। जबकि मशीन लर्निग एआई की विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था। मशीन लर्निग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझना बहुत से लोगों के लिए आसान नहीं है।

मशीन लर्निग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है जिसके बिना मशीन लर्निग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निग की रीढ़ माना जा सकता है। मशीन लर्निग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है। डेटा तब तक बेकार है जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता है मशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यो को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निग से स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्टअप देखे जा रहे हैं जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन नए तकनीक स्टार्टअप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

गूगल, अमेजॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों को डेटा संग्रह करने में सालों लगे हैं और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दी से जल्दी सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं। ऐसे उद्योग लंबे समय तक नहीं टिकते हैं क्योंकि मशीन लर्निग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मशीन लर्निग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में। हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्टअप उद्योगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है जो वर्षो से युवाओं को आवश्यक नौकरी, विशिष्ट कौशल प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

इन स्टार्टअप उद्योगों के बीच में यूथ4वर्क तकनीक मूल्यांकन और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रूप में उभर कर सामने आया है। वर्तमान समय में इसके साथ भारत के लगभग 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वाले युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम से विस्तृत कॉपोर्रेट मूल्यांकन प्रदान करता है जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर यूथ4वर्क चार साल से अधिक वर्षो से काम कर रहा है।

हाल ही में यूथ4वर्क के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35 फीसदी से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मिला है। अगर वर्तमान में देखें तो लगभग 1.79 करोड़ युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 1.9 करोड़ होने की संभावना है।

भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास यूथ4वर्क जैसे मंच की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। यूथ4वर्क का लक्ष्य है कि 2022 तक लगभग 5.0 करोड़ उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सकें।

(रचित जैन यूथ4वर्क के सीईओ हैं।)

Hindi & English News Story (Author Articles):

English News Story (Author Articles):

Data is the key that makes the scope of Machine learning promising

-Rachit Jain, CEO of Youth4work

Machine Learning A term that was coined by Arthur Samuel in 1959 is creating a lot of fuss in the present time. As to why is not very hard to say, machine learning has been a buzz word in India for quite some time now. But what it really is and how it really works is altogether a different story that remains out of grasp for many.

If the current perception is to be believed then Machine Learning seems to be synonymous with AI, Artificial Intelligence and more often than not these two terms are used interchangeably. Also, these two ultra-sophisticated terms bring high cachet to the table, especially when an argument regarding technology is involved. But the truth is that machine learning and AI are two different subjects. In layman’s terms, AI aims to make machines smarter by giving those capabilities to think on their own feet to make decisions or mimic human actions whereas machine learning is just a sub set of the vast concept, that is, AI.

The most crucial aspect of machine learning is Data. Without data it is not possible. Data is the backbone of ML. Machine learning is an application of and within the AI that provides computers with the ability of learning and to improve from experience without being explicitly programmed. Data is used by the machines to create patterns that make sense to them. Data by itself is useless, unless it is treated in meaningful ways and machines can perform unimageable tasks with data using mathematical algorithm and block chains.

The number of Indian Machine Learning Start-ups is on the rise. On an average 10 to 15 such new tech start-ups are seen every month, with each claiming to be better than the other. But the success of a new tech start-up cannot be ensured by mere sophisticated AI tools and applications. Having data is essential and acquiring reliable data takes time and effort if done with right ethical practises unlike Cambridge Analytica. Giants like Google, Amazon, and Facebooktook years to accumulate hoards of data and their data is used by many other emerging tech enterprises that are looking for shortcut successes. Such enterprises won’t last long in the long run because machine learning will only prove to be beneficial if the end results are insightfully unique and this can only be ensured with the authenticity of the data so used.

Nonetheless, scope of machine learning cannot be overlooked, especially in the fields of education and recruitment processes. There have been some promising start-ups in recent times that have dedicated and devoted themselves, over the years, in providing youth with the much needed “job-specific skills” that are essential to survive and sustain growth in a highly volatile job market of the present. Among these start-ups, Youth4work has emerged as a leader in assessment technology and online youth skill testing.

Since its inception six years ago, the company “Youth4work” has been busy improving and reinventing itself. It now has a user base of over 3 million in India. The platform uses machine learning techniques within the domains of AI to assess the scores of thousands of test-takers every day and gives detailed corporate-assessment by generating yTal Reports, which is a patent mechanism that youth4work has been working with for more than four years. Therefore, the data so analysed and projected is unique in terms of accuracy and authenticity. Having 30 Lacs youth tested and profiled across India and the globe, Youth4work has emerged as the fastest growing Skill platform in India and impacting millions of lives.

A recent survey by Youth4work analysed that more than 35% of India’s Youth is unemployed, which is even lower than the average of global employment level. According to figures projected by the survey report, our country will see a marginal stagnation in 2018–19. As of now, 17.9 million are unemployed and this estimate will further expand to 19 million in 2019.

“The size of the youth in our country is enormous and not every youth has the luxury of having platforms like “Youth4work” at his/her disposal or are just unaware. So, it is going to be a tremendous challenge to bring these sequestered fractions of the young generation together at one place where talent can be nurtured into employable job skills. Nevertheless, we are attracting newer crowds and the numbers are growing; our resolve to achieve 50 million users by 2022 has only become firmer,” expresses Rachit Jain, CEO of Youth4work.

By,

Rachit Jain,

Founder & CEO — Youth4work.com

Hindi News Story (Author Articles):

मशीन लर्निंग की सुविधा से होगा युवाओं के कौशल का विकास: Youth4work

· रोजगार प्राप्त करने के लिए मशीन लर्निंग बन सकता हैं एक उचित मार्ग, परन्तु मशीन लर्निंग की सुविधा के लिए डेटा है एक महत्वपूर्ण कुंजी

मशीन लर्निंग शब्द का इस्तेमाल 1959 में आर्थर शमूएल ने किया था जो वर्तमान समय में चर्चा का विषय बना हुआ है। मनीन लर्निंग के बारें में सिखना एक आसान काम नहीं है लेकिन वास्तव मेंमशीन लर्निंग क्या है और यह कैसे काम करता है इस बारें में जानकारी प्राप्त करना और इसे समझनाबहुत से लोगों के लिए आसान नहींहै।

यदि वर्तमान तथ्यों को देखा जाए, तो मशीन लर्निंगको एआईऔरआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाना समझा जाता है लेकिन मशीन लर्निंगइन दोनों की तुलना मेंएक अलग प्रक्रिया है। एआईऔरआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ये दोनों हीटर्म अत्याधुनिक रुप से सर्वोतम स्थान पर आते हैं,खासकर जब तकनीक के संबंध में इनका प्रयोग किया जाता है।लेकिन सच्चाई यह है, कि मशीन लर्निंग और एआई दो अलग-अलग विषय हैं।सरल शब्दों में कहा जाए तो, एआई का लक्ष्य उन क्षमताओं को विकसीत करना है जो मानव कार्यों की नकल करने के लिए मशीनों को योग्य बेनाना है जिससे वे बेहतर हो सके। जबकि मशीन लर्निंग एआई के विशाल अवधारणा का एक हिस्सा है।

मशीन लर्निंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डेटा है,जिसके बिना मशीन लर्निंग संभव नहीं है। डेटा को मशीन लर्निंग की रीढ़ की माना जा सकता है।मशीन लर्निंग एआई के अंदर आने वाली एक एप्लीकेशन है, जो कंप्यूटर सीखने की क्षमता और बिना प्रोग्राम के अपने अनुभव को सुधारने की क्षमता प्रदान करता है। मशीनों द्वारा डेटा का उपयोग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है जो उसे समझने में मदद करते है।डेटा तब तक बेकार है, जब तक इसका अर्थ सार्थक तरीकों से नहीं किया जाता हैमशीनें गणितीय एल्गोरिदम और ब्लॉक चेन का उपयोग कर डेटा के साथ अनावश्यक कार्यों को कर सकती हैं।

भारतीय मशीन लर्निंग से स्टार्ट-अप की संख्या बढ़ रही है।हर महीने औसतन 10 से 15 नए तकनीक स्टार्ट-अप देखे जा रहे है, जो एक-दूसरे से बेहतर होने का दावा करते है।लेकिन नए तकनीक स्टार्ट-अप की सफलता को केवल प्रगतिशील एआई उपकरणों और ऐप्लिकेशन के माध्यम से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसके लिएडेटा आवश्यक है और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और कैम्ब्रिज विश्लेषणात्मकता के विपरीत सही नैतिक नियमों के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए। गूगल, अमेज़ॅन और फेसबुक जैसे दिग्गजों ने डेटा का संग्रहकरने में सालों लगे है और उनके डेटा का उपयोग कई अन्य उभरते तकनीकी उद्यमों द्वारा किया जा रहा है जो जल्दि से जल्दि सफलता प्राप्त करने की तलाश में हैं।ऐसे उदयोग लंबे समय तक नहीं टिकते है, क्योंकि मशीन लर्निंग केवल तभी फायदेमंद साबित होती है जब अंतिम परिणाम व्यावहारिक रुप से सबसे अलग हो जिसे प्रमाणिक डेटा के उपयोग के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।

फिर भी, मशीन लर्निंग के दायरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है, खासकर शिक्षा और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं के क्षेत्र में।हाल के दिनों में कुछ ऐसे स्टार्ट-अप उद्योगोंके बारें में जानकारि प्राप्त हुई हैं जो वर्षों से, युवाओं को आवश्यक “नौकरी-विशिष्ट कौशल” प्रदान करने में और वर्तमान समय में अस्थिर नौकरी बाजार में वृद्धि बनाएरखने में मदद कर रहे है।इन स्टार्ट-अप उद्योगों के बीच मेंYouth4work,तकनीक मूल्यांक और ऑनलाइन कौशल टेस्ट के रुप में उभर कर सामने आया है।

छह साल पहले स्थापित हुआ यह मंचहर समय नई तकनीकों का प्रयोग कर स्वंय को सुधारने और बेहतर करने में लगा हुआ है। वर्तमान समय में Youth4work केसाथ भारत के लगभग 3 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता जुडे हुए है। यह मंच हर दिन हजारों टेस्ट देने वालें युवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एआई के डोमेन के भीतर मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करता है और वाईटल रिपोर्ट्स के माध्यम सेविस्तृत कॉर्पोरेट मूल्यांकन प्रदान करता है, जो एक पेटेंट तंत्र है जिस पर Youth4workचार सल से अधिक वर्षों से काम कर रहा है।

हालही में Youth4workके द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 35% से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो विश्व के रोजगार स्तर से बहुत कम है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट की माने तो 2018–19 में बेरोजगारी के क्षेत्र में मामूली ठहराव देखने को मीला है। अगर वर्तमान समय को देखे तो लगभग17.9 मिलियन युवा बेरोजगार हैं जो 2019 में लगभग 19 मिलियन होने की संभावना है।

Youth4work के CEO रजित जैन का इस विषय पर कहना है कि,“भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है जिनमें से बहुत से युवाओं के पास Youth4work जैसे मंच की सुविधाए प्राप्त करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण प्रत्येक युवा के कौशल का विकास करना एक बड़ी चुनौती बन गई है लेकिन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए हम युवाओ को उनके कौशल का विकास करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे और उनके कौशल को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने में मदद कर रहे है। ताकि वे अपने कौशल के आधार पर रोजगार प्राप्त कर सके।हमारा लक्ष्य है कि हम 2022 तक लगभग 50 मिलियन उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सके।”

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